Monday, June 26, 2017

महिला सशक्तिकरण


महिला सशक्तिकरण

महिला सशक्तिकरण महिलाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें स्वयं के निर्णय लेने के लिए एक बहुत ही बड़ा कदम है जिससे कि वे समाज में व्यक्तिगत सीमाओं को दूर कर आगे बढ़ सकें और अपने विचारों को लोगों के सामने रख सकें। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें सामाजिक और पारिवारिक सीमाओं को छोड़ उन्हें अपने मन, विचार, अधिकार, निर्णय आदि से सभी पहलुओं में स्वतंत्र बनाने कि आवश्यकता है। पुरुष और महिला को सामान रूप से सम्मान और कार्य मिलने की जरूरत है। महिला सशक्तिकरण प्रभावी होना समाज, देश और दुनिया के उज्जवल भविष्य के लिए बहुत ही आवश्यक है। देश को पूरी तरीके से विकसित बनाने के लिए महिलाओं को सशक्त बनाना बहुत ही जरूरी है।

महिला सशक्तिकरण के लिए योजनाए 

किसी भी समाज के विकास का सीधा सम्बन्ध उस समाज की महिलाओ के विकास से  जुड़ा होता है | महिलाओ के विकास के बिना व्यक्ति,परिवार और समाज के  विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती है | महिलाओ के विकास के लिए सरकार ने कुछ योजनाओ जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला  योजना, सुकन्या योजना और कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय योजना आदि की शुरुआत की है |


बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ

 माननीय प्रधानमंत्री महोदय श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत जिले से ‘बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओं’ अभियान का शुभारम्भ किया ।


प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना 

इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री मोदी द्वारा  1 मई 2016 को की गई।  इस योजना के अंतर्गत गरीब महिलाओ को मुफ्त एलपीजी गैस कनेक्शन दिये जा रहे है। योजना का मुख्य उद्देश्य महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना और उनकी सुरक्षा करना है। इस योजना के माध्यम से सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले जीवाश्म ईंधन की जगह एलपीजी के उपयोग को बढ़ावा देकर पर्यावरण को स्वच्छ रखने में महिलाओ की भूमिका को बढ़ाना चाहती है।


सुकन्या योजना 


बेटी की पढ़ाई व शादी के लिए पैसे की टेंशन दूर करने को अब आप डाक विभाग के पास ‘सुकन्या समृद्धि योजना’ का अकाउंट खुलवा सकते हैं। प्रधानमंत्री द्वारा हरियाणा में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ कैंपेन में इस स्कीम की शुरुआत की गई। डाक विभाग के सभी पोस्ट ऑफिसेज के साथ अकाउंट खोलने के लिए सुविधा सेंटर में भी अलग काउंटर खुलेगा। यहां जरूरी डॉक्यूमेंट्स जमा कराने के बाद अकाउंट खुल सकेगा। इस अकाउंट में एक फाइनेंशियल ईयर में कम से कम 1 हजार और अधिक से अधिक डेढ़ लाख रुपया या इसके बीच की कितनी भी रकम जमा कर सकते हैं। यह पैसा अकाउंट खुलने के 14 साल तक ही जमा करवाना पड़ेगा। मगर, खाता बेटी के 21 साल की होने पर ही मैच्योर होगा। बेटी के 18 साल के होने पर आधा पैसा निकलवा सकते हैं।
21 साल के बाद खाता बंद हो जाएगा और पैसा गार्जियन को मिल जाएगा। अगर बेटी की 18 से 21 साल के बीच मैरिज हो जाती है तो अकांउट उसी वक्त बंद हो जाएगा। अगर पेमेंट लेट हुई तो सिर्फ 50 रुपए की पैनल्टी लगेगी। गार्जियन अपनी दो बेटियों के लिए दो अकाउंट खोल सकते हैं। जुड़वां होने पर उसका प्रूफ देकर ही तीसरा खाता खोल सकेंगे। खाते को आप कहीं भी ट्रांसफर करा सकेंगे।


कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय 

इस योजना का शुभारम्भ 2004 में किया गया था। यह योजना वर्ष 2004 से उन सभी क्षेत्रों में क्रियान्वित की जा रही है ग्रामीण महिला साक्षरता की दर राष्ट्रीय स्तर से कम है। इस योजना में मुख्य रूप ऐसी बालिकाओं पर ध्यान देना है जो विद्यालय से बहार है जिनकी उम्र 10 वर्ष से ऊपर है। 




1 comment:

  1. मुझे आपका ब्लॉग को बहुत आकर्षक और प्रभावशाली लगा है। मुझे आपका ब्लॉग पसंद आया है| मनीषा बापना मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रही हैं। वह बच्चों, युवा लड़कियों और महिलाओं को अच्छे स्पर्श और बुरा स्पर्श के बारे में भी जानकारी प्रदान करती है। महिलाओं को लिए बेहतर स्थिति प्रदान करने के लिए डॉ. मनीषा बापना महिला सशक्तिकरण के लिए काम करती हैं।

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